Sunday, 8 November 2009

ग़ज़ल् ४१

पर्वर्‌दिगार् ! कुव्वत्-ए काफ़िर् तो देख्‌ना
होता है रोज़् याँ बुत्-ए ग़ाफ़िल् से साम्ना

बंदा-नवाज़् ! यॆः तॆरा कैसा नवाज़्‌‌ना
सॆह्रा है तू मगर् नहीँ "मज्नूँ" से आश्ना

साक़ी , तू माप्-कर् मय्-ए पुर्-तुन्द् उबाल्‌ना
हम् सर्-ख़्व़ुदोँ का कौन् है ? तू ही सँभाल्‌ना

"रौशन्" , तू फ़ार्सी मेँ ज़ियादः न बोल्‌ना
उत्कृष्ट हो जो तू कहे उर्दू मेँ भावना

सागर् मेँ बूँद् , अग्नि मेँ घी , और् हवा मेँ बू !
होता है हर् पतंग् किसी शम्ऽ मेँ फ़ना

अफ़्शाँ लहू-ए ऽआशिक़्-ए बिस्मिल् है हर् तरफ़्
होता है यूँ मिझ़ः से , क़साई की , साम्ना

कैसी ऽअजब् है वस्ल् की तृष्णा , कि आज् भी
आँखेँ बिछाए राह् मेँ राधा है , मोहना

आज़ाद् रूह् है , उसे आज़ाद् रॆह्‌ने दो !
दीवार् मेँ "अनार्‌कली" को न गाढ़्‌ना

पाएगा जिस् को ढूँढ् रहा है तू दर्-ब-दर्
इक् बार् अप्‌नी रूह् के अंदर् भी झाँक्‌ना

आया था कब् जहान् मेँ "रौशन्" किसी के संग्
जाएगा छोड़् कर् भी अकेला ही , देख्‌ना



पर्वर्‌दिगार् = nourisher, protector; met. address to God.
कुव्वत् = strength, power.
काफ़िर् = infidel; met. lover / beloved.
बुत् = idol; beloved.
ग़ाफ़िल् = neglectful; careless.
बंदा-नवाज़् = cherisher of servant; met. address to God.
नवाज़्-ना = to caress, to soothe.
सॆह्रा = desert; met. a land full of possibilities.
आश्ना = acquainted.
साक़ी = cup-bearer; met. God.
मय् = wine.
तुन्द् = sharp, acrid; fierce.
सर्-ख़्व़ुद् = independent.
उत्कृष्ट = superior; exalted.
पतंग् = moth.
शम्ऽ = candle.
अफ़्शाँ = scattering; pouring out.
बिस्मिल् = slaughtered, sacrificed.
मिझ़ः = eyelash.
क़साई = butcher.
वस्ल् = union (with beloved).
तृष्णा = desire; thirst.
दर्-ब-दर् = door to door.
रूह् = soul.


Sunday, 9 August 2009

बंदिश् ४० (नज़्र्-ए "फ़ेस्‌बुक्")

बिछ्ड़े हुए हबीबोँ की होती है जब् मुलाक़ात्
तुफ़ान् लेके आता है यादोँ की कोई सौग़ात्

मुद्दत् हुई थी , भूले थे यारोँ की शक्ल् तक् हम्
यादोँ की डोर् थी टूटी , बाक़ी थे कुछ् ख़यालात्

हम् वॊः नहीँ जो बैठेँगे हाथोँ पॆ हाथ् धर्-कर्
मौक़ऽ मिला तो कर् देँगे हम् इक् नई शुरूऽआत्

हल् "फ़ेस्‌बुक्" के द्वारा ही होगा हमारा मस्लः
इस् वास्ते कि हैँ उस्‌मेँ कुछ् आधुनिक् करामात्

बस्‌ते हैँ गो-कि दुन्या मेँ सब् दूर् दूर् , लेकिन्
होते हैँ "फ़ेस्‌बुक्" से अब् मिल्‌ने के इत्तिफ़ाक़ात्

जम्-घट् है दोस्तो अप्‌ना , यॆः "फ़ेस्‌बुक्" की मह्फ़िल्
होता है फिर् जहाँ चर्चा , छिड़्‌ती है फिर् जहाँ बात्

हर् इक् वतन् मेँ होता है मश्हूर् सब् का अह्वाल्
कश्मीर् हो कि केरळ् हो , बंगाल् हो कि गुज्रात्

सोते हुए कहाँ हम्‌को पड़्‌ता है चैन् , यऽनी
होते ही सुब्ह् पढ़्‌ते हैँ यारोँ की हम् हिकायात्

ऐसा भी हम् से होता है दम् भर् न हम् हैँ रुक्‌ते
कोई ख़याल् आते ही लिख् देँ तुरंत् , अर्थात्

अव्वल् लिखा हो जो , उस्‌को सम्‌झो न हर्फ़्-ए आख़िर् !
"स्ट़ैट़स्" बदल्‌ते रॆह्‌ते हैँ "औफ़िस्" से ता-ख़राबात्

उम्मीद् हम् को है "रोशन्" इस् अंजुमन् मेँ अप्‌ने
वा-पस् जुड़ेँगे रिश्ते और् उभ्रेँगे फिर् से जज़्बात्



हबीब् = beloved; friend.
मुलाक़ात् = meeting; conversation.
तूफ़ान् = typhoon; deluge.
सौग़ात् = rich present; curiosity.
मुद्दत् = duration.
शक्ल् = likeness, resemblance; form.
ख़यालात् = thoughts.
मौक़ऽ = fit place; situation; occasion.
शुरूऽआत् = beginnings.
हल् = solution.
मस्लः = problem.
इस् वास्ते कि = because, for the reason that.
आधुनिक् = of the present moment.
करामात् = miracles.
गो-कि = even if; although.
इत्तिफ़ाक़ात् = events, occurrences.
जम्-घट् = crowd.
मह्फ़िल् = assembly, congregation.
चर्चा = discussion; discourse; gossip.
वतन् = country, abode, dwelling.
मश्हूर् = well-known, famous, notorious; public.
अह्वाल् = condition; state of affairs.
चैन् = comfort, peace.
हिकायात् = tales, stories.
ख़याल् = thought, idea.
तुरंत् = quickly.
अर्थात् = in fact; that is to say.
अव्वल् = first.
हर्फ़्-ए आख़िर् = the last letter/word.
"औफ़िस्" से ता-ख़राबात् = from (the) office to (the) tavern.
उम्मीद् = hope, expectation; trust.
अंजुमन् = assembly; banquet.
वा-पस् = again.
रिश्तः = thread; connection, relationship; affinity.
जज़्बात् = passions.


Friday, 22 June 2007

ग़ज़ल् ३९

मुझ्‌से पूछो न ज़माने की हक़ीक़त् यारो
तुम्‌ने भी रक्खी शराफ़त् से ऽअदावत् यारो

इक् नज़र् देख्ते तो होती क़ियामत् यारो ?
या यही तर्ज़-ए तग़ाफ़ुल् है महब्बत् यारो

पय्-ए साक़ी से लिपट् कर् जो कभी ग़श् खाना
रिन्द्-ए काफ़िर् की नज़र् मेँ है ऽइबादत् यारो

देख् कर् उस् मॆह्-ए नौ की कज्-अदाएँ हर्-सू
छोड़् दी हम् ने महब्बत् मेँ शराफ़त् यारो



हक़ीक़त् = essence; truth, fact; state.
शराफ़त् = nobility.
ऽअदावत् रख् ना = to bear enmity (to), to bear malice (towards)
क़ियामत् = resurrection; tumult; a great calamity.
तर्ज़् = form; manner, style.
तग़ाफ़ुल् = neglect, indifference.
पय्-ए साक़ी = foot of the cupbearer.
ग़श् खाना = to swoon, to faint; to be enamoured (of), to fall in love (with).
रिन्द् = rogue; reprobate, drunkard, libertine.
काफ़िर् = infidel, impious.
ऽइबादत् = worship, adoration, devotion.
मॆह्-ए नौ = new moon; (met.) young/new beloved.
कज्-अदा = crooked manner.
हर्-सू = in every direction.